History Of Mihirbhoj Gurjar King ll Gurjar Pratiharo ki kuldevi ll Father's name of Mihirbhoj ll गुर्जर प्रतिहार वंश की कुलदेवी ll मिहिर भोज के पिता का नाम ll मिहिर भोज का जीवन परिचय ll भारत का सबसे शक्तिशाली सम्राटll अरब आक्रमणकारियों का काल ll गुर्जर इतिहास ll History of Pratiharas ll Gurjar history page ll Mihrbhoj hd photos ll Nagbhat Gurjar ll
गुर्जर सम्राट मिहिर भोज का सामान्य जीवन परिचय ✨✨✨✨✨✨🙏🚩
(1) वंश - सूर्यवंशी (गुर्जर)
(2) कुल - गुर्जर प्रतिहार
(3) पिता - सम्राट रामभद्र गुर्जर
(4) माता - अप्पा देवी
(5) राजधानी - कन्नौज ,मंडोर
(6) कुलदेवी - चामुंडा माता
(7) युद्ध घोष - हर हर महादेव
(8) भक्त - विष्णु, महादेव
(9) लक्ष्य - सनातन भारत
(10)शासन काल -836-885,90)
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कई बार दुश्मनों के दांत खट्टे किए सम्राट मिहिरभोज ने .........
मिहिरभोज उस दौर में राजा बने, जब इस्लामी कट्टरपंथी अक्सर भारत की धरती पर कब्जा करने के इरादे से हमले करते थे. ऐसे हमलावरों से निपटने के लिए गुर्जर सम्राट मिहिरभोज ने भी अपनी सेना को बेहद मजबूत और विशाल बना लिया था.
उनके साम्राज्य की सीमाएं आधुनिक भारत के राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, गुजरात, हिमाचल तक फैली थी. मिहिरभोज के विशाल साम्राज्य की राजधानी कन्नौज में थी।।
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भिन्नमाल गुर्जरों के साम्राज्य की प्रथम राजधानी थी। भिन्नमाल के अन्य नाम श्रीमाल और भिलमाल भी प्रचलित है। 12वीं-13वीं शती में रचित प्रभावकचरित नामक ग्रंथ में प्रभाचंद्र ने श्रीमाल को गुर्जर देश का प्रमुख नगर कहा है-
राजधानी भिन्नमाल
इतिहास के अनुसार 5वीं सदी में गुर्जरों ने भीनमाल को अपने साम्राज्य की राजधानी बनाया था।[1]भरुच का साम्राज्य भी गुर्जरो के अधीन था। चीनी यात्री ह्वेन त्सांग अपने लेखों में गुर्जरो के साम्राज्य का उल्लेख करता है तथा इसे kiu-che-lo बोलता है।[2]यात्री युवानच्वांग ने लिखा है कि गुर्जरो ने यहाँ समृद्ध राज्य किया था।[3]ये गुर्जर स्वयं को विशुद्ध क्षत्रिय और श्रीराम के प्रतिहार लक्ष्मण का वंशज मानते थे। भिन्नमाल और कन्नौज के गुर्जर-प्रतिहार राजा बहुत प्रतापी और यशस्वी हुए हैं। भिन्नमाल के राजाओं में वत्सराज (775-800 ई.) पहला प्रतापी राजा था। इसने बंगाल तक अपनी विजय पताका फहराई और वहाँ के पालवंशीय राजा धर्मपाल को युद्ध में पराजित किया। मालवा पर भी इसका शासन स्थापित हो गया था। वत्सराज को राष्ट्रकूट नरेश राजध्रुव से पराजित होना पड़ा, अतः उसका महाराष्ट्र-विजय का स्वप्न साकार न हो सका। वत्सराज के पुत्र नागभट्ट द्वितीय ने धर्मपाल को मुंगेर की लड़ाई में हराया और उसके द्वारा नियुक्त कन्नौज के शासक चक्रायुध से कन्नौज को छीन लिया। उसके प्रभुत्व का विस्तार काठियावाड़ से बंगाल तक और कन्नौज से आन्ध्र प्रदेश तक स्थापित था। उसने सिंध के अरबों को भी पश्चिमी भारत में अग्रसर होने से रोका। किन्तु अपने पिता की भाँति नागभट्ट को भी राष्ट्रकूट नरेश से हार माननी पड़ी। इस समय राष्ट्रकूट का शासक गोविन्द तृतीय था। नागभट्ट के पौत्र मिहिरभोज (836-890 ई.) ने उत्तर भारत में गुर्जर-प्रतिहारों के समाप्त होते हुए प्रभुत्व को सम्भाला। इसने अपने विस्तृत राज्य का भली-भाँति शासन प्रबन्ध करने के लिए, अपनी राजधानी भिन्नमाल से हटाकर कन्नौज में स्थापित की। इस प्रकार भिन्नमाल को लगभग 100 वर्षों तक प्रतापी गुर्जर शासकों का अधिकार बना रहा ।।
गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज जी के नाम से थर्राते थे अरब मुस्लिम आक्रमणकारी लोग
और तो और सम्राट मिहिर भोज जी ने अरब मुस्लिम सरदार खलीफा की मूछें तक काट ली थी
ऐसे थे हमारे गुर्जर सम्राट जिन्होंने भारत देश की रक्षा के खातिर अपना सब कुछ नौछावर कर दिया ll
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एक परमार तो 🚩 📃
दूजो बगड़ावत ⚔️
और तीजो मिहिरभोज सरदार 🏹🗡 !!
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गुर्जर सम्राट मिहिर भोज गुर्जर प्रतिहार राजवंश के सबसे महानतम शक्तिशाली गुर्जर शासक माने जाते हैं इनका साम्राज्य कश्मीर से लेकर कर्नाटक तक और मुल्तान से लेकर पश्चिम बंगाल तक और पूरे उत्तर भारत पर सम्राट गुर्जर मिहिर भोज का साम्राज्य फैला हुआ था ll
गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य ने अपने शुरूआती शासनकाल मे ही पूरी दूनिया को अपनी ताकत से हिला दिया था। इनका शासन काल 6ठी शताब्दी से 10वी शताब्दी तक रहा। गुर्जर प्रतिहारों ने अरबों से 300 वर्ष तक लगभग 200 से ज्यादा युद्ध किये और हर बार विजयी हुए।
जिसका परिणाम है कि आज यहां हिंदू धर्म सुरक्षित है। अरबो की विशाल आँधी के सामने वीर गुर्जर अपने रणनृत्य का प्रदर्शन करते हुए भिडे जिसे इतिहास राजस्थान के युद्ध /Battle of Rajasthan जोकि गुर्जरो व अरबो के बीच हुए के नाम से जानता है। भारत मे कोई ऐसा स्थान नही बचा जहां गुर्जर प्रतिहारो ने अपनी तलवार और निर्माण कला का जौहर ना दिखाया हो। गुर्जर प्रतिहारो ने सैकडो सालो तक राष्ट्रकूट और पाल साम्राज्य से भयंकर युध्द किए और हर बार विजयी हुए। गुर्जर प्रतिहारो के दुश्मन चारो ओर थे। दक्षिण मे राष्ट्रकुटो से, पूरब मे बंगाल के पालो से और पश्चिम में अरबो-डकैतों, इराकी,मंगोलो, तुर्कों से। जिसमें गुर्जरो ने अभूतपूर्व साहस व पराक्रम दिखाते हुए अरबो को बाहर खदेडा । भारत की हजारो साल से बनने वाली सभ्यता व संस्कृति को अरबो द्वारा होने वाली हानि से गुर्जरो ने बचाया व लगभग साढे तीन सौ सालो तर गुर्जर भारत के रक्षक/प्रतिहार बने रहे । प्रतिहार यानी द्वारपाल। देश के रक्षक।
350 सालो तक लगातार युद्ध के बाद जब अरब, राष्ट्रकुट और पाल साम्राज्य ने एक साथ मिलकर युद्ध किए वहीं से गुर्जर प्रतिहारो का पतन होने लगा और विदेशी ताकतो को भारत देश मे घुसने का अवसर मिला। इसके बाद के काल को ही सल्तनत और मुगल काल कहा जाता है।
भारत देश हमेशा ही गुर्जर प्रतिहारो का रिणी रहेगा उनके अदभुत शौर्य और पराक्रम का जो उनहोंने अपनी मातृभूमि के लिए न्यौछावर किया है। जिसे सभी विद्वानों ने भी माना गुर्जर-प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज (836-885) के राज्य को गुर्जरात्रा कहा जाता था। गुर्जरात्रा एक संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ होता है गुर्जरों से रक्षित भूमि।
प्राकृत भाषा में गुर्जरात्रा को गुजरात्ता कहा जाता है।
गुजरात्ता से बिगड़़कर ही गुजरात शब्द बना है।
मिहिर भोज के समय चौहान, चावड़ा, गुहिल, परमार, तंवर और चंदेल राजवंश सम्राट मिहिर भोज के सांमत थे।
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